बुद्धिं देहि यशो देहि कवित्वं देहि देहि मे ।
मूढत्वं च हरेद्देवि त्राहि मां शरणागतम् ॥

भावार्थ :

हे देवि ! आप मुझे बुद्धि दें, कीर्ति दें, कवित्वशक्ति दें और मेरी मूढता का नाश करें । आप मुझ शरणागत की रक्षा करें ।

जडानां जडतां हन्ति भक्तानां भक्तवत्सला ।
मूढ़ता हर मे देवि त्राहि मां शरणागतम् ॥

भावार्थ :

आप मूर्खों की मूर्खता का नाश करती हैं और भक्तों के लिये भक्तवत्सला हैं । हे देवि ! आप मेरी मूढ़ता को हरें और मुझ शरणागत की रक्षा करें ।

सौम्यक्रोधधरे रुपे चण्डरूपे नमोऽस्तु ते ।
सृष्टिरुपे नमस्तुभ्यं त्राहि मां शरणागतम् ॥

भावार्थ :

सौम्य क्रोध धारण करनेवाली, उत्तम विग्रहवाली, प्रचण्ड स्वरूपवाली हे देवि ! आपको नमस्कार है ।
हे सृष्टिस्वरूपिणि आपको नमस्कार है । आप मुझ शरणागत की रक्षा करें ।

घोररुपे महारावे सर्वशत्रुभयङ्करि ।
भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणागतम् ॥

भावार्थ :

भयानक रूपवाली, घोर निनाद करनेवाली, सभी शत्रुओं को भयभीत करनेवाली तथा भक्तों
को वर प्रदान करनेवाली है देवि ! आप मुझ शरणागत की रक्षा करें ।

नमो देवी महाविद्ये नमामि चरणौ तव ।
सदा ज्ञानप्रकाशं में देहि सर्वार्थदे शिवे ॥

भावार्थ :

हे देवि ! आपको नमस्कार है । हे महाविद्ये ! में आपके चरणों में बार-बार नमन करता हूँ । सर्वार्थदायिनी शिवे ! आप मुझे सदा ज्ञानरूपी प्रकाश प्रदान कीजिये ।

विद्या त्वमेव ननु बुद्धिमतां नराणां शक्तिस्त्वमेव किल शक्तिमतां सदैव ।
त्वं कीर्तिकान्तिकमलामलतुष्टिरूपा मुक्तिप्रदा विरतिरेव मनुष्यलोके ॥

भावार्थ :

आप निश्चय ही सदा से बुद्धिमान् पुरुषों की विद्या तथा शक्तिशाली पुरुषों की शक्ति हैं । आप कीर्ति, कान्ति, लक्ष्मी तथा निर्मल तुष्टिस्वरूपा हैं और इस मनुष्य लोक में आप ही मोक्ष प्रदान करने वाली विरक्तिस्वरूपा हैं ।