Sanskrit Essay On Durga Puja(दुर्गा पूजा संस्कृत निबंध)

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दुर्गा पूजा

आश्विन शुक्लपक्षे प्रतिवर्षं दुर्गा पूजयन्ति भारतवासिनः । विशेषेण भारतदेशस्य पूर्वस्यां दक्षिणस्यां दिशि, बंग, असम, अरुणाचल, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालयं, मिजोरम, नागालैंड, बिहार, उड़ीसा, आन्ध्र, तमिलनाडु आदि राज्येषु अयं महोत्सवः उसाहेन प्रवर्तते । देवासुरसंग्राम महिषासुरेण भयंकरं युद्धम् प्रवुत्तम् । तस्मिन् विजयार्थ सर्वे देवाः मिलित्वा संयुक्तां शक्तिं निर्माय अयुध्यन्त । अतः इयं पूजा शक्तिपूजापि कथ्यते । प्रतिपदा प्रभृति दशमी यावत् अयम उत्सवः आयोजयते । देव्याः पुजनेन मानवस्य न कुत्रापि पराजयों भवति ।

दुर्गायै दुर्गपारायै सारायै सर्वकारिण्यै ख्यात्यै तथैव कृष्णायै धूम्रायै सततं नमः ॥

हिन्दी अनुवाद :
आश्विन महिना के शुक्ल पक्ष में प्रतिवर्ष भारत के लोग दुर्गा पूजते है । खासकर भारत के पूर्व और दक्षिण में वंगाल, असम, अरुणाचल, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, बिहार, उड़ीसा, आन्ध्र, तमिलनाडु आदि राज्यों में यह महोत्सव उत्साह पूर्वक मनाया जाता है । देवासुर समय में महिषासुर के साथ भयंकर युद्ध हुआ था । उसपर विजय प्राप्त करने के लिए सभी देवता मिलकर शक्ति का निर्माण किए । अतः इस पूजा को शक्ति पूजा भी कहा जाता है । यह पर्व परीव तिथि से लेकर दशमी तिथि तक मनाया जाता है । देवी के पूजने से मानव की कही पराजय नहीं होती है ।

दुर्गा, दुर्गपारा, सारा, सर्वकारिणी, ख्याति, कृष्णा और धूम्रा देवी को सर्वदा नमस्कार है ।

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