मूषिकोत्तममारुह्य देवासुरमहाहवे । योद्धुकामं महावीर्यं वन्देऽहं गणनायकम् ॥

भावार्थ :
श्रेष्ठ मूषक पर सवार होकर देवासुरमहासंग्राम में युद्ध की इच्छा करनेवाले महान् बलशाली गणनायक गणेश की मैं वन्दना करता हूँ ।

अम्बिकाहृदयानन्दं मातृभिः परिवेष्टितम् । भक्तिप्रियं मदोन्मत्तं वन्देऽहं गणनायकम् ॥

भावार्थ :
भगवती पार्वती के हृदय को आनन्द देनेवाले, मातृकाओं से अनावृत, भक्तों के प्रिय, मद से उन्मत्त की तरह बने हुए गणनायक गणेश की मैं वन्दना करता हूँ ।

जय सिद्धिपते महामते जय बुद्धीश जडार्तसद्गते । जय योगिसमूहसद्गुरो जय सेवारत कल्पनातरो ॥

भावार्थ :
हे सिद्धिपते ! हे महापते ! आपकी जय हो । हे बुद्धिस्वामिन् ! हे जड़मति तथा दुःखियों के सद्गति-स्वरूप ! आपकी जय हो ! हे योगियों के सद्गुरु ! आपकी जय हो । हे सेवापरायणजनों के लिये कल्पवृक्षस्वरूप ! आपकी जय हो !

जननीजनकसुखप्रदो निखलानिष्ठहरोऽखिलेष्टदः । गणनायक एव मामवेद्रदपाशाङ्कुमोदकान् दधत् ॥

भावार्थ :
माता-पिता को सुख देनेवाले, सम्पूर्ण विघ्न दूर करनेवाले, सम्पूर्ण कामनाएँ पूर्ण करनेवाले एवं दन्त-पाश-अंकुश-मोदक धारण करनेवाले गणनायक मेरी रक्षा करें ।

गजराजमुखाय ते नमो मृगराजोत्तमवाहनाय ते । द्विजराजकलाभृते नमो गणराजाय सदा नमोऽस्तु ते ॥

भावार्थ :
गजराज के समान मुखवाले आपको नमस्कार है, मृगराज से भी उत्तम वहनवाले आपको नमस्कार है, चन्द्रकलाधारी आपको नमस्कार है और गणों के स्वामी आपको सदा नमस्कार है ।

गणनाथ गणेश विघ्नराट् शिवसूनो जगदेकसद्गुरो । सुरमानुषगीतमद्यशः प्रणतं मामव संसृतेर्भयात् ॥

भावार्थ :
हे गणनाथ ! हे गणेश ! हे विघ्नराज ! हे शिवपुत्र ! हे जगत् के एकमात्र सद्गुरु ! देवताओं तथा मनुष्यों के द्धारा किये गये उत्तम यशोगानवाले आप सांसारिक भय से मुझ शरणागत की रक्षा कीजिये ।