वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि ।
मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ ॥

भावार्थ :

अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों, और मङ्गलोंकी करने वाली सरस्वतीजी और गणेश जी की में वन्दना करता हूँ ।

ॐ असतो मा सद्गमय तमसो मा ज्योतिर्गमय,
मॄत्योर्मा अमॄतं गमय ॥

भावार्थ :

हे प्रभु! असत्य से सत्य, अन्धकार से प्रकाश और मृत्यु से अमरता की ओर मेरी गति हो ।