Sanskrit Essay On Mahatma Gandhi(महात्मा गाँधी संस्कृत निबंध)

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प्रिय नेता (महात्मा गाँधी)

अस्माकं प्रिय नेता राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी अस्ति । स हि गतोऽपि जीवितः एव अस्ति । यशस्विनो जनाः भौतिकेन शरीरेण म्रियन्ते । यशः शरीरेण ते सदा जीवन्ति । महात्मा गाँधी गुर्जरजोऽपि अखिलभारतीय आसीत् । सत्यभाषणं, सत्याचरणम् तस्य जीवनादर्शम् आसीत् । मनसि वचसि कर्मणि च तस्य एकता आसीत् । अफ्रिकादेशे सुख्यातिं लब्ध्वा स्वदेशसमागत्य स्वदेशस्य स्वाधीनतायै सत्यग्रहः कृतः निखिलः देशः तं पितरम् अमन्यत । तस्यैव प्रयत्नेन अस्माभिः स्वाधीनता लब्धा । सः महापुरुषः अपरः बुद्धः आसीत् । सत्ये अहिंसायां तस्य दृढ़ः विश्वासः आसीत् ।

हिन्दी अनुवाद :
हमलोगों का प्रियनेता राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी है । वह मर कर भी जीवित है । यशस्वी व्यक्ति भौतिक शरीर से मरते हैं । यश शरीर के रूप में वह सदा जीवित रहते हैं । महात्मा गाँधी गुर्जर भारतीय थे । सत्यबोलना, सत्याचरण करना उनके जीवन का आदर्श था । उनके मन, वचन और कर्म में समानता था । अफ्रीका देश में ख्याति प्राप्त कर स्वदेश लौटकर स्वतंत्रता आंदोलन में सत्याग्रह किए और देश उनको पिता मान लिया । उनके प्रयास से ही हमलोगों को स्वतंत्रता मिला । वह महापुरुष दूसरे बुद्ध का अवतार था । सत्य अहिंसा में उनको दृढ़ विशवास था ।

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